श्री साई गुरूवार अति पुनीत पावन
साई नाम से खिलता मन का सावन
साई वार करे आज रहमत की बरसात
इस भव में साँई नाम लेकर रहे सब साथ
सांई का वार लाये खुशियो की सौगाते
सांई नाम लेकर तो गूँगे भी साई साई गाते
सांई सदगुरू का आज आया है श्री वार
साँई पर सब छोड़ दो वो देंगे मातृ सम दुलार
साँई श्री वार से कर नेकी के काज आरम्भ
ताकि साँई तुझे विनीत बनाये मिटाये तेरा दम्भ
साँई वार पर आज साई को ध्या लो शपथ
तज देंगे हम सभी आज से ही छल झूठ कपट
आज साई वार पर बने हमारा एक परिवार
जिसमे सब मिलके रहे और करे सद्व्यवहार
आराध्य साँई से अब है यही प्रार्थना
हम बच्चो का साँई तू ही हाथ थामना
Wednesday, May 6, 2015
श्री साई वार
Friday, April 24, 2015
मेरा परिचय
ना कोई तारीफ मेरी, ना मुझमें कुछ खास
साईं के दर्शन की रखता हूं आस
इस दुनियावी चोले को गौरव कहते हैं लोग
साईं नाम जाप का पाया है सुयोग
जयपुर मे बाबा ने डलवाया है डेरा
यही बस सीधा सा परिचय है मेरा
बाबा ने हाथ पकडा और कृपा की अपार
इक साईं स्तुति की रचना करवाई अपरम्पार
मैं तो एक अदना सा प्राणी हूँ
न मेरा किस्सा न कहानी है
साई का जीवन साई ही के नाम है
साई साई रटता हूँ यही मेरा काम है
Saturday, April 18, 2015
साई सुप्रभातम्
साई अपनी आभा बरसाते बनके रवि
साई किरणों में पाप कट जाते है सभी
जिस पल बसा ली मन मन्दिर में साई छवि
मन का कोना कोना दिव्यमान हो जाता तभी
साई का तो गुण है गाते ये आसमा जमी
साई सबको है अपनाते न देखे कोई कमी
भूल के राग द्वेष बन जाओ साई प्रेमी
जिसका मन निर्मल हो साई रहते है वही
श्रद्धा सबूरी रखने वाला ही है साई पथगामी
जिसने साई महिमा पुरे दिल से है बखानी
साई माफ़ करता उसकी गलती उसकी नादानी
जिसने अपने मन में बैठे साई को पहचानी
साई उसकी जिव्हा में बसते बनके मधुर वाणी