साई अपनी आभा बरसाते बनके रवि
साई किरणों में पाप कट जाते है सभी
जिस पल बसा ली मन मन्दिर में साई छवि
मन का कोना कोना दिव्यमान हो जाता तभी
साई का तो गुण है गाते ये आसमा जमी
साई सबको है अपनाते न देखे कोई कमी
भूल के राग द्वेष बन जाओ साई प्रेमी
जिसका मन निर्मल हो साई रहते है वही
श्रद्धा सबूरी रखने वाला ही है साई पथगामी
जिसने साई महिमा पुरे दिल से है बखानी
साई माफ़ करता उसकी गलती उसकी नादानी
जिसने अपने मन में बैठे साई को पहचानी
साई उसकी जिव्हा में बसते बनके मधुर वाणी
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Saturday, April 18, 2015
साई सुप्रभातम्
Friday, April 17, 2015
दिन आरम्भ
साई नाम से हो आज दिन आरम्भ
तज के सारे अभिमान और दम्भ
ताकि पल में दुःख दर्द गम हो कम
विनम्र बन साई चरणों में झुके रहे हरदम
Sunday, April 12, 2015
श्री साई सुप्रभात
ॐ श्री साई सुप्रभात
मुख पर हो साई की बात
साई ही है मेरे दिल के सम्राट
पाना चाहूँ मैं सदा साई का साथ
चन्द्र सम शीतलता लिए आया वार सोम
आज साई गुणगान करेगा मेरा रोम रोम
नूर दमकता आज जिनका वो है साई ओम
जिनका बखान करते ये धरती ये व्योम
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