साई अपनी आभा बरसाते बनके रवि
साई किरणों में पाप कट जाते है सभी
जिस पल बसा ली मन मन्दिर में साई छवि
मन का कोना कोना दिव्यमान हो जाता तभी
साई का तो गुण है गाते ये आसमा जमी
साई सबको है अपनाते न देखे कोई कमी
भूल के राग द्वेष बन जाओ साई प्रेमी
जिसका मन निर्मल हो साई रहते है वही
श्रद्धा सबूरी रखने वाला ही है साई पथगामी
जिसने साई महिमा पुरे दिल से है बखानी
साई माफ़ करता उसकी गलती उसकी नादानी
जिसने अपने मन में बैठे साई को पहचानी
साई उसकी जिव्हा में बसते बनके मधुर वाणी
Saturday, April 18, 2015
साई सुप्रभातम्
Friday, April 17, 2015
साई सच्चा साथी
साई- सच्चा साथी
चलते चलते राहो में
हर राहगीर मुझे ऐसा मिला
कुछ दूर तक साथ निभाया
फिर वो भी चल निकला
यही तो जीवन का सच है
इसको मैं था यूह भूला
तन्हा हो गया था मैं
दे रहा खुद के खुद को शिकवा गला
तब ही आँखों में मेरे इक चमक दौड़ी
इक दिव्य आभा लिए
एक राहगीर और मिला
अब तक सबकी ऊँगली मैंने थामी थी
इस राहगीर ने मेरी ऊँगली थामी
पल भी देर लगी समझते मुझे
ये ही है राहगीर जो मुझे सच्चा मिला
मैंने पुछा कौन हो तुम
तो मन्द मुस्कान लिए वो बोला:-
रे प्यारे बच्चे न कर तू आँखों को गीला
मैं तो तेरा सदगुरू बाबा साई ही हूँ
तेरे दुष्कर्मो में तू था अब तक मुझे भूला
ये सुन मैं अश्रुविहिल हुआ
आँखे मेरी नम हुई पर शब्द इक न निकला
तब मुझे कुछ भी न सूझा
तुरन्त साई चरणो में मैं गिर पड़ा
साई ने मुझे उठाया लगाया गले
उन्होंने इक मधुर वचन बोला:-
नेक काज कर तू होगा तेरा भला
तब मुझे इस जीवन पथ का मर्म समझ आया
सदगुरू साई के इक इक शब्द ने
मेरे तन मन जीवन में मधुर रस घोला
दिन आरम्भ
साई नाम से हो आज दिन आरम्भ
तज के सारे अभिमान और दम्भ
ताकि पल में दुःख दर्द गम हो कम
विनम्र बन साई चरणों में झुके रहे हरदम
Sunday, April 12, 2015
श्री साई सुप्रभात
ॐ श्री साई सुप्रभात
मुख पर हो साई की बात
साई ही है मेरे दिल के सम्राट
पाना चाहूँ मैं सदा साई का साथ
चन्द्र सम शीतलता लिए आया वार सोम
आज साई गुणगान करेगा मेरा रोम रोम
नूर दमकता आज जिनका वो है साई ओम
जिनका बखान करते ये धरती ये व्योम