Wednesday, April 20, 2016

साँई गुणगान करते चलो

:: ll साँई गुणगान करते चलो ll ::

श्री साँई तुम गुरूवर हो
तुम हो सर्व गुणों की खान
तेरे रंग में हम खुद को रंग ले
करते रहे हम तेरा ही बखान ।

बाबा साँई तुम चन्दन समान
तेरी सुगन्ध फ़ैल रही चहुँ ओर
इस सुगन्ध को मन में रमा ले
ताकि मिले तव चरणो में ठौर ।

बाबा साँई तुम राम सरीखे
अति विनम्र अति धैर्यवान
तुम्हारी शिर्डी है राम- राज्य
जहाँ मिलता सबको जीवनदान ।

एक वार ही तुझको क्यों पूजे
सप्ताह के सातो वार है तेरे
तू ही भोले, तू ही गजानन
हनु बन तू ही दूर करे अँधेरे ।

बाबा चौखट पर तेरी रखते जो कदम
ग़मो का अंत होता, ख़ुशी रहती हरदम ।

तेरा नाम जग में सबसे पावन
"सा" से साक्षात् , 'ई" से ईश्वर
जब हमे ईश्वर ही है मिल गया
तो भला क्यों मांगें तुझसे हम वर ।।
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Friday, February 12, 2016

लिखने दो मुझे

लिखने दो मुझे लिखने दो , साईं की महिमा लिखने दो ,
पर लेखनी में नही मेरे शब्द कोई ,
तो श्रद्धा सबूरी की स्याह भरने दो ।
करने दो मुझे करने दो,
साईं का गुणगान करने दो,
पर मेरी आवाज मधुर नही,
तो साईं की उदी जरा चखने दो ।
रोने दो मुझे ख़ुशी के मोती बहाने
दो,
पर आँखों में इतना अदम्य साहस नही,
तो मुझे साईं
की अपार रहमत का सूरमा आँखों में लगाने दो ।।

Saturday, January 16, 2016

सुनो पुकार.....हे साँई

घबराया मन और टूटती साँसे
बिखरे लफ़्ज और गम के साये
कुछ यूह हो गया है मेरा हाल
अपनी पहचान खो रहा हूँ अब मैं
लग रहा कि नजदीक मेरा मृत्यु काल
बाबा साँई तुम ही मेरे परम् सखा हो
तुमको माना है मैंने अपना संसार
अब देर न लगाओ आने में प्रभु
इस मुश्किल भरे जीवन से गया मैं हार
बाबा साँई तुमने सदा मुझे सम्भाला है
तुम्हारी लीलाओ का है मुझे इतंजार
फिर से कोई लीला रच दो तुम कि
दुःख भरे जीवन में लौटे फिर से बहार

Tuesday, January 12, 2016

इक गुजारिश

बाबा साँई तुमसे बस है इतनी सी गुजारिश
हम सब पर करो तुम रहमतो की बारिश
भर भर उडेलो तुम हम पर अपना प्यार
तुम्हारा प्यार पा हमारे जीवन में आये सद्व्यवहार
सद्व्यवहार से हमारा तन मन महके चन्दन सा
तुम्हारे सुमिरन में लगा दे हम हर क्षण जीवन का
क्षण वो भाग्यशाली होगा जब दोगे तुम दर्शन
तुम्हारे दर्शन करके हम पापी बन जायेंगे सज्जन
सज्जन बने हम और अपनाये विनम्र आचरण
सब जनो के प्रति दिखाए हम अपनापन
अपना सब कुछ तुम पर करके हम न्यौछावर
बाबा तेरी शरण पाने का चाहे हम तुझसे वर

जहाज का पँछी

कहते हैं कि जहाज का पंक्षी
लौट के जहाज पर ही आये.
क्या हो उस पक्षी का जिसका
जहाज ही समंदर में डूब जाए?
ऐसे मैं इस पंछी को कुछ समझ ना आये ,
आखिर ये पंछी किसके पास जाए,
ऐसे में साईं ही हमें बचाए
वो हर कदम पर साथ निभाए ।

Sunday, January 10, 2016

साँई से रिश्ता

••••••••••••साँई से रिश्ता••••••••••••
जग में साँई से रिश्ता है अपना
बाकि थोथे है सब रिश्ते व्यवहार
तो क्यों न साँई से ऐसे रिश्ता जोड़े
कि पल में भूले हम ये सारा संसार
साँई हमे अपने चरणों में स्थान देकर
करे हम बच्चों पर इक बड़ा उपकार
साँई नाम से हम मन बगिया को सजाये
और हमारी रसना करती रहे साँई की जयकार
बाबा के हम न कोई बड़े ही भक्त
नही जानते भक्ति का कोई प्रकार
बस साँई साँई रटता आता है हमे
साँई नाम ही है हमारा जीवन सार
न ही अर्पण करने को हमारे पास कुछ
बस अर्पण करते है हम अश्रुओं का हार
यकीन है कि बाबा हमारा भाव देखेंगे
और करेंगे उन अश्रुओं को स्वीकार
अब इस जिंदगी में बचे हो सौ साल
या चाहे भले बचे हो अब दिन चार
हर पल साँई की बातो में बिताएंगे
गाकर बाबा साँई की लीलाएँ अपरम्पार
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Friday, December 4, 2015

माखन चोरी नही...मन की चोरी

•【【माखन चोरी नही..मन की चोरी】】•

एक दिन गोपी ने कहा की आज तो कन्हैया को रंगे हाँथो
पकड़ कर यशोदा के पास लेकर ही जावूँगी ।
कन्हैया जेसे ही माखन चुरा कर खाने लगे
गोपी ने झट हाँथ पकड़ लिया।
अब कन्हैया को यसोदा के पास ले जा रही है, और पीछे पीछे
ग्वाल बाल चल रहे है, उस ग्वाल बालो के साथ गोपी का
पति भी था।
गोपी कुछ दुर गयी और देखा की कुछ बुजुर्ग खड़े है, तो गोपी
ने घुंघट निकाल
दिया।
अब कृष्ण ने सोचा की गोपि से हाँथ छुड़ाने का ये मोका
अच्छा है वर्ना आज तो मैया से मार पड़ेगी….
कृष्ण गोपी को बोले-
“प्रभा काकी मेरे इस हाँथ मे दर्द होने लगा है दूसरा हाँथ पकड़
लो।
गोपी को दया आ गयी की छोटो सो लाला है हाथ दर्द कर
रहा होगा , “गोपी बोली ठीक है दूसरा हाँथ पकड़ा लो ।
कृष्ण ने पीछे चल रहे गोपी के पति को हाँथ से गोल गोल
इशारा किया की आजा लड्डू दूंगा।
गोपी ने जेसे ही कृष्ण का दूसरा हाँथ पकड़ा तो कृष्ण ने उनके
हाँथ में पति का हाँथ पकड़ा दिया ,और खुद भाग निकले।
अब गोपी नन्द बाबा के घर के बाहर से ही जोर जोर से
चिलाने लगी की:-
‘अरी ओओओओ…………
यसोदा मैया देख आज तेरे लाला को रंगे हाँथो पकड़ कर
लायी हु , रोज रोज कहती है मेरा छोरा बड़ा सीधा है आज
तोरे लाला को माखन चोरी करते हुए मेने रंगे हाँथो पकड़ है.!
और मैया समझ गयी की ये सब घुंघट
का काम है, मैया बोली:-
‘अरि सखी जरा घुंघट हटा कर पीछे तो देख माजा लाला है
या तुमचा घरवाला’!
गोपी घुंघट हटा के पीछे देखती है तो पति का हाँथ गोपी के
हाँथ में.!
“गोपी बोली तूम यहाँ केसे आ गये?
अब वो तो सब भूल गया ,और
कहा की कन्हैया ने कहा की लड्डू
दूंगा….
गोपी बोली ‘कन्हैया ने कहा लड्डू दूंगा और तुम आ गये ,मेरे
पीछे पीछे आने की क्या जरूरत थी ,कन्हैया कहा है ?
पति बोला, ‘कन्हैया तो कब का भाग चूका.’
गोपी बोली ,’कन्हैया को भगा दिया और तुम आ गये घर
चलो तुम्हे में लड्डू देती हु.’
अब गोपी का पति तो घबराने लगा ..
उतने में कन्हैया आख मलते मलते अन्दर
से आये, और बोले ‘कोंन है मैया ,कोंन
गोपी चिला रही है ‘?..
ओहोहोहोहो प्रभा काकी आप.!
गोपी बोली ‘प्रभा काकी के इथर आ तू रुक
अब.
कन्हैया आगे आगे और गोपी पीछे पीछे, कन्हैया ठेंगा दिखाते
हुए बोले ‘ले पकड़ पकड़ पकड़ पकड़.!
कन्हैया बोले ‘गोपी अब की पकड़वे
की कोसिस की सो पति का हाँथ पकड़ा दिओ, आगे से
पकड़वे की कोसिस की तो ससुर का हाँथ पकड़वा दुगा… मेरा
नाम
भी कन्हेया है, ,कन्हेया’.
ऐसे है हमारे ठाकुर जी माखन चोर ,ये माखन चोरी नही ये तो
मनकी चोरि है ,
श्री कृष्ण तो गोपियाँ के मन चुराते है…
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