Saturday, August 6, 2016

Happy Friendship Day BABA SAI

*आज मैंने मित्र दिवस पर इन भावों के जरिये बाबा को मित्र दिवस की शुभकामनाएं दी* :-

सखा रूप में हमे अपना लो
जैसे तुम्हारे सखा थे भक्त शामा
साँई तुम बन जाओ आज श्रीकृष्ण
और हमे बना लो अपना मित्र सुदामा

साँई हमे गुणों की खान बना दो
हम खुद को तेरा सखा कह ले
चाहे एक दिन के लिए ही सही
संग में तेरे मित्र रूप में रह ले ।।

*तो लगा कि जैसे बाबा साँई शुभकामनाये स्वीकार करते हुए प्रत्युत्तर में मुझे यह बोलना चाह रहे है कि*....

"" मित्र रूप में हूँ मैं संग तुम्हारे
इस बात को तुम जानो निश्चित
तुम्हारी हर साँस पर मेरा वास हैं
मेरी लीलाओ से तुम हो अपरिचित ""
:- *_Baba Sai_* .

Tuesday, July 12, 2016

साँई का साथ- सबसे प्यारा

:: ।। *साँई का साथ-सबसे प्यारा* ।। ::

साँई से माँग लो तुम चाहे हाथ पसार
बाबा साँई तो झोली भी भर देंगे बेशुमार

बेशुमार दौलत भरी हो चाहे जेब में
पर सारी दौलत चली जायेगी बेकार
मन की शांति तो प्रेम से ही मिलेगी
साँई प्रेम ही है सुखी जीवन का सार

साँई से प्रेम करके तो देख जरा
माँ के आँचल सा होगा अहसास
जीवन में कभी तू अकेला न होगा
बाबा साँई बस जाएंगे तेरी हर साँस

साँस लेना जब हो जाये कठिन
और मुश्किल ले तुझको गर घेर
तब हर साँस में साँई साँई पुकारना
साँई न करेंगे आने में इक पल भी देर

देर न कर जन्म बीता जा रहा
ये मानव जन्म है बड़ा अनमोल
इस जन्म को साँई सुमिरन में लगा
साँई तेरे जीवन में देंगे खुशियाँ घोल

घोल साँई के कहे शब्दों को तू अपने मन में
ताकि विनम्रता और संस्कार आये जीवन में

जीवन में मित्र की कमी थी मुझ नन्हे को
तब साँई तुम मुझे मित्र रूप में मिल गए
तुमने गुरू बन भी मुझको शिक्षा दी अनेक
तब से मुझ अभागी के सोये भाग खुल गए

बरसो से मेरी बंद किस्मत पल में खुल गयी
और कहने लगी- "गौरव तू अबसे भाग्यवान है"
क्योकि अब तेरे हर शब्द में बाबा साँई है बसते
बाबा साँई के नाम से जग में अब तेरी पहचान है
http://drgauravsai.blogspot.in/

Friday, May 6, 2016

How do we see Baba Sai ?

बाबा को हम सभी का देखने का नजरिया अलग अलग है.......

कोई बाबा को मूर्ति रूप में देखता है,
तो कोई बाबा को अपने सपनो में बाबा को देखता है एवम् बाबा को खुद के साथ महसूस करता है,
कोई मन्दिर जाकर आरती में बाबा को महसूस करता है,
तो कोई भजन सुनते समय बाबा को महसूस करता है,
तो कोई श्री साँई सच्चरित्र में बाबा को देखता है कि जिसने उस वक्त कितने लोगो में प्रेम बांटा कितने लोगो का भला किया ,
तो कुछ भक्त ऐसे भी है जो खुद के साथ बाबा की अद्भुत लीलाओ के माध्यम से बाबा को महसूस करते है,
और कुछ लोग वो भी है जो अपने कार्यो में बाबा को पाते है ।

सबका अपना अपना नजरिया है बाबा को देखने का और बाबा की मौजूदगी महसूस करने का ......
परन्तु-
The luckiest are the ones who identify their own actions as the outcome of inner motivations generated by Baba.
The best devotees are those who in every motivation and action find the play of His Divine play-लीला .

श्री साँई अमृततुल्य सुवचन- कर्मचक्र

:: ll श्री साँई अमृततुल्य सुवचन ll ::

:- कर्मचक्र-

" कर्म देह प्रारम्भ (वर्तमान भाग्य), पिछले कर्मो का फल अवश्य भोगना पड़ेगा, गुरु इन कष्टों को सहकर सहना सिखाता है, गुरु सृष्टि नहीं दृष्टि बदलता है ।"- Baba Sai.

श्री साँई चरण ही हमारी शरण

हे हम सबके आराध्य बाबा साँई ,

                   हम सभी का मन-मधुप आपके चरण कमल में ध्यान लगाने और भजन सुनने व् आपकी कृतियों को पढ़ने में लगा रहे । आपके अतिरिक्त भी अन्य कोई ईश्वर है, इसका हमें ज्ञान नहीं । हम पर आप सदा दया और स्नेह करें और अपने चरणों के दीन हम दासों की रक्षा कर हम सभी का कल्याण करें ।
आपके भवभयनाशक चरणों का स्मरण करते हुये हमारा जीवन आनन्द से व्यतीत हो जाये, ऐसी मेरी आपसे विनम्र प्रार्थना है ।

हे श्री साँई, तव श्री चरणों में हमारा साष्टांग प्रणाम ।

श्री साँई सच्चरित्र अमृतोपदेश-अध्याय 6

:: ll श्री साँई सच्चरित्र अमृतोपदेश ll ::

श्री साईबाबा के मनोहर रुप के दर्शन कर कंठ प्रफुल्लता से रुँध जाता है, आँखों से अश्रुधारा प्रवाहित होने लगती है और जब हृदय भावनाओं से भर जाता है, तब सोडहं भाव की जागृति होकर आत्मानुभव के आननन्द का आभास होने लगता है । मैं और तू का भेद (दैृतभाव) नष्ट हो जाता है और तत्क्षण ही ब्रहृा के साथ अभिन्नता प्राप्त हो जाती है ।

(श्री साँई सच्चरित्र अध्याय 6)

Thursday, May 5, 2016

साँई ही हमारा संसार

बाबा साँई में होगी कुछ ख़ास बात
तभी साँई को पूजता है सारा संसार
जो बाबा साँई की शरण में आ गया
उसके मन में साँई नाम की है झंकार
जिसने सब्र रख साँई में श्रद्धा कर ली
वो जीवन में सीख लेता है सद्व्यवहार
जो हर जन में साँई का दर्शन करे,
उस पर साँई कृपा बरसती है बेशुमार
शौहरत की चाह छोड़ जो साँई में डूबे
उसके जीवन में लगता है खुशियों का भण्डार
जिसका सब अपनों ने छोड़ दिया हो साथ
उसका तब बाबा साँई बनता है मददगार
बीच मंझधार में फ़ंसती जब जीवन नैया
तब बाबा साँई लगा देता है नैया को पार
बाबा भक्तो पर अपार रहमतें है लुटाता
कोई इसे उसकी लीला कहता कोई कहे चमत्कार
बाबा की शरण में इक बार आकर तो देखो
जीवन से हट जायेगा तुम्हारे पापो का भार
कर्म सदा नेक कर सत्य की राहो पर चलना ,तो
लोगो के लिए प्रशंसनीय होगा तुम्हारा जीवन सार
जब जीवन में चहुँ ओर दिखे अँधियारा
तो बाबा साँई को बना लेना जीवन आधार
मैल तुम्हारी युगों की धुल तबियत निखरेगी
और बाबा साँई जोड़ेंगे तुमसे दिल के तार
ग़मो की धूप से जो मन संकीर्ण हुआ था
साँई कृपा पा खुशियों से मन का होगा विस्तार
साँई तेरे संग रहेंगे जीवन के हर क्षण में
बस तू साँई को समझना अपना घरबार
साँई ने बाँटी शिक्षा " श्रद्धा और सबूरी" की
ये " श्रद्धा और सबूरी " है सर्वोत्तम सुविचार
जो जन इसको अपने जीवन में अपना ले
उसके मन से निकले साँई नाम बारम्बार
साँई चरणों को समझे जो अपना आशियाना
उसके जीवन को पल में देते है बाबा संवार
जिनका जीवन में कोई नही होता अपना
उनको बाबा देते है मातृ पितृ सम दुलार
दुनिया की सुध छोड़ साँई में ऐसे डुबो
कि तन मन पर छड़ जाये साँई नाम का खुमार
हर रोज हर पल साँई साँई रटते चलो
फिर चाहे जीवन में दिन बचे हो चार
साँई नाम से वो चार दिन भी पावन बनेंगे
और बाबा साँई की रहमत बरसेगी अपरम्पार
साँई ने हमे ये मानव देह दी और अपना बनाया
इसके लिये साँई का तहे दिल से करते हम आभार